खतौली। वर्ष 2007 में तहसील बनने के बाद लंबे समय तक खतौली के लोगों को प्रशासनिक व्यवस्था से अपेक्षित राहत नहीं मिल सकी। फरियादियों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए तहसील से लेकर जिला मुख्यालय तक चक्कर लगाने पड़ते थे। राजस्व विवादों, भूमि संबंधी मामलों और अन्य शिकायतों के निस्तारण में देरी आम बात मानी जाती थी, लेकिन पिछले कुछ समय में तहसीलकर्मियों की कार्यशैली में बदलाव साफ दिखाई देने लगा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उप जिलाधिकारी डॉ. ललित मिश्रा के कार्यभार संभालने के बाद जनसुनवाई व्यवस्था अधिक सक्रिय और परिणामोन्मुख हुई है।
तहसील परिसर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण, किसान, महिलाएं, बुजुर्ग और युवा अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं। निर्धारित जन सुनवाई का समय समाप्त होने के बाद भी डॉ. मिश्रा तब तक अपने कक्ष से नहीं उठते, जब तक अंतिम फरियादी की शिकायत सुन नहीं ली जाती। शिकायत सुनने के तुरंत बाद संबंधित लेखपाल, राजस्व निरीक्षक, विभागीय अधिकारी या थाना प्रभारी से सीधे दूरभाष पर वार्ता कर आवश्यक निर्देश देना उनकी कार्यशैली का हिस्सा बन चुका है। इसका असर यह हुआ है कि अनेक मामलों का समाधान मौके पर ही होने लगा है और लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि पहले छोटी-छोटी शिकायतें भी जिलाधिकारी कार्यालय तक पहुंच जाती थीं, जबकि अब अधिकांश मामलों का निस्तारण तहसील स्तर पर ही हो रहा है। इससे प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति लोगों का विश्वास भी बढ़ा है और मुख्यमंत्री पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के समयब( निस्तारण में भी तेजी आई है। डॉ. ललित मिश्रा की कार्यशैली केवल कार्यालय तक सीमित नहीं है। आवश्यकता पड़ने पर वह स्वयं गांवों में पहुंचकर लोगों से संवाद करते हैं और मौके पर समस्याओं का समाधान कराने का प्रयास करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इससे प्रशासन और जनता के बीच संवाद मजबूत हुआ है। उनके सरकारी आवास पर भी आम लोगों के लिए मिलने की व्यवस्था सहज बनी हुई है, जिससे लोगों को अपनी बात रखने में आसानी होती है। हाल ही में लखनऊ के अग्निकांड के बाद खतौली तहसील क्षेत्र के अस्पतालों, कोचिंग सेंटरों और अन्य संस्थानों में सुरक्षा मानकों की जांच के लिए चलाया गया अभियान भी चर्चा में रहा। इस दौरान अग्निशमन सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं का गंभीरता से परीक्षण कराया गया तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। आगामी कांवड़ यात्रा को लेकर भी प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। सड़क, स्वच्छता, यातायात, पेयजल और अन्य व्यवस्थाओं की लगातार समीक्षा की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस बार यात्रा को अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। राजस्व प्रशासन की दृष्टि से भी डॉ. ललित मिश्रा का कार्यकाल महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तहसील क्षेत्र के गांव पुरबालियान में पिछले चार दशक से अधिक समय से लंबित चकबंदी प्रक्रिया को पूरा कराना प्रशासन की बड़ी उपलब्धियों में गिना जा रहा है। इस कार्य की जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने भी सराहना की है और संबंधित अधिकारियों की टीम के प्रयासों की प्रशंसा की है। स्थानीय लोगों का मानना है कि त्वरित निर्णय, नियमित जनसुनवाई, मौके पर कार्रवाई और जवाबदेह प्रशासनिक कार्यशैली के कारण खतौली तहसील की कार्यप्रणाली में सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है। नागरिकों का कहना है कि यदि यही गति बनी रही तो आने वाले समय में तहसील प्रशासन आमजन की समस्याओं के समाधान का और अधिक प्रभावी केंद्र बन सकता है।





