मुजफ्फरनगर। फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या तीन के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने मांडी गांव में हुई राजबीर की हत्या में दो आरोपियों को मृत्यदंड की सजा सुनाई है। न्यायाधीश ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि लोकतंत्र में हथियार और खून-खराबे की कोई जगह नहीं है। हत्या की यह वारदात 16 साल पहले गांव प्रधानी की रंजिश में अंजाम दी गई थी। इस हत्या से जुडे दो आरोपी पहले ही पुलिस मुठभेड में मारे चुके है।
तितावी थाना क्षेत्र के मांडी निवासी किसान राजबीर सिंह की 24 अगस्त 2010 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वारदात के समय किसान सिंह अपने खेत पर मौजूद थे। बेटे प्रदीप कुमार ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस जांच में गांव के ही सहदेव उर्फ पप्पू, प्रमोद, अमित और विपिन शर्मा का नाम सामने आया था। आरोपी अमित और विपिन शर्मा पुलिस मुठभेड़ में मारे गए। इसी वजह से आरोपपत्र में उनका नाम शामिल नहीं किया गया। प्रधान पद की रंजिश में हत्या की वारदात अंजाम दी गई थी।
शासकीय अधिवक्ता राजीव शर्मा ने बताया कि अभियोजन पक्ष ने प्रभावी पैरोकारी करते हुए अदालत में आठ गवाह पेश किए। साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों सहदेव और प्रमोद को 30 जून को दोषी करार दिया गया था। फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या तीन के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने सोमवार को अपना फैसला सुनाते हुए दोनों आरोपियों को मृत्युदंड और एक-एक लाख रूपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।





