मुजफ्फरनगर। आदमपुर गांव में इज्जत की खातिर बडे भाई ने परिजनों की मदद से छोटी बहन की गर्दन काटकर हत्या कर दी। युवती को परिजन आज ही दूसरे गांव से घर पर लाए थे और जब वह अपनी जिद पर अडी रही तो उसे मौत के घाट उतार दिया है। ऑनर किलिंग की इस वारदात से पूरे इलाके में अफरातफरी मची है। एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने एसपी देहात अक्षय सजय महाडिक के साथ घटनास्थल का अवलोकन किया।
ऑनर किलिंग की यह वारदात आदमपुर गांव में रविवार सुबह हुई। बतया गया है कि शकील की 20 वर्षीय बेटी अदीबा बीते डेढ साल से अपने खानदान के लोगों के साथ पलडी में रहती थी। परिवार के लोग अदीबा को पलडी गांव से घर लेकर आए थे। इसी दौरान घर में किसी को बात को लेकर विवाद हुआ और अदीबा की धारदार हथियार से गर्दन काटकर हत्या कर दी गई। घर के फर्श पर अदीबा का खून से लथपथ शव पडा दिखाई दिया तो कुछ ही देर में पूरे गांव में अदीबा की हत्या की खबर आग की तरह फैल गई। गांव के चौकीदार आबिद की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंच गई। इसी बीच एसएसपी संजय कुमार वर्मा, एसपी देहात अक्षय संजय महाडिक और सीओ बुढाना गजेन्द्र सिंह भी मौके पर आ गए। अधिकारियों ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली।
सूत्रों के अनुसार अदीबा का एक परिचित से प्रेम‘-संबंध थे। इन संबंधों को लेकर परिजन बेहद नाराज थे। मामला उछला तो परिजन उसे पलडी से गांव ले आए। परिजनों ने उसे समझाने की भरसक कोशिश की, लेकिन वो अपने प्रेमी के साथ जाने की जिद पर अडी थी। आक्रोशित भाई ने परिजनों की मदद से बहन की गर्दन काटकर हत्या कर दी। एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने बताया कि परिवार के सदस्यों ने मिलकर हत्या की वारदात अंजाम दिया है। जल्द ही आरोपियों को पकड लिया जाएगा।
मौहब्बत करने वाले अपनों के खून से रंगा पडा मुजफ्फरनगर का इतिहास
खंदरावली से शुरू हुआ प्रेमी-युगलों के कत्ल का सिलसिला आज भी बादूस्तर जारी
राकेश शर्मा
मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर में प्यार में फंसकर घर की दहलीज लांगने वाले युगलों के कत्ल का इतिहास पुराना है। रिश्तों और जात-पात की दीवारों के बीच फंसे अनगिनत प्रेमी-युगलों को आखिकार मौत ही नसीब हुई है। आदमपुर में रविवार को फिर इसकी पुनर्रावृति हुई। आन-बान के लिए भाई ने परिजनों की मौन सहमति पर अपनी बहन को मौत के घाट उतार दिया। खंदरवाली से शुरू हुआ ऑनर किलिंग का सिलसिला लगातार जारी है। वक्त के साथ कानून सख्त भी हुआ, मगर इज्जत की खातिर रिश्तों का खून बहाने में अपनों के हाथ नहीं कांप रहे है।
प्रेमी-युगलों के कत्लगाह के रूप में मशहूर मुजफ्फरनगर में आज भी कबिलाई संस्कृति हॉवी है। आधुनिक दौर में ग्रामीण अंचलों में प्यार को आज भी गुनाह माना जाता रहा है। इज्जत का वास्ता देकर अपनों का खून बहाना आम बात हो गई है। शाहपुर के आदमपुर गांव में हुई युवती की हत्या ने पुरानी घटनाओं की याद को ताजा करा दिया है। अदीबा भी किसी अपने से दिल लगाने की भूल कर गई थी, जो परिजनों को नागुवार गुजरी। प्यार के जुनून में अदीबा विरोध में उतरी तो उसका हश्र अन्य युगलों की तरह हुआ। जिदंगी देने वाले अपनो ने ही उसकी सांसे छीन ली।
मुजफ्फरनगर में प्रेमी-युगल के कत्ल का सिलसिला 1994 में खंदरावली से शुरू हुआ था, जहां पर रिश्ते में चाचा-भतीजी होते हुए सतीश और सरिता ने घर से भागकर शादी रचाने की भूल की थी। भरी पंचायत में दोनों के सर धड से अलग कर दिए गए थे। ऐसी ही झकझोर देने वाली घटना झिंझाना क्षेत्र में हुई, जहां पर प्रेम के दुश्मन समाज ने युगल को उपलों के बिटौडे में जिंदा जला दिया था। कांधला क्षेत्र के जसाला में भी प्रेमी-युगल को मारकर रेलवे लाइन पर फेंक दिया गया था, ताकि उसे हादसा साबित किया जा सके। मुजफ्फरनगर के मीनाक्षी चौक पर सरेआम महिला चिकित्सक और उसके प्रेमी को प्रेम करने की सजा मिली थी। दोनों को सरेआम सडक पर धारदार हथियारों से काट दिया गया था। पिछले साल नई मंडी क्षेत्र में प्रेमी के साथ जाने की जिद पर अडी बेटी को पिता ने मौत की नींद सुला दिया था। यही नहीं भोपा क्षेत्र में दो बेटियों ने प्रेम-संबंधों में बाधक बने पिता का कत्ल कर दिया था। इस तरह की घटनाओं से मुजफ्फरनगर का इतिहास खून से रंगा पडा है। वक्त के साथ कानून सख्त हुए और पुलिस ने दोषियों को दंडित कराने में कामयाबी हासिल भी की, लेकिन मुजफ्फरनगर ऑनर किलिंग के अभिशाप से मुक्त नहीं हो पाया है। समाज को झकझोर देने वाली इस तरह की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती है।






