मुजफ्फरनगर। भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) ने किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर सोमवार को प्रशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। संगठन ने कृषि क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए शीघ्र समाधान की मांग की।
जिलाध्यक्ष नकुल अहलावत के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते का व्यापक प्रभाव कृषि क्षेत्र और आम जनमानस पर पड़ सकता है। संगठन ने किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस समझौते पर पुनर्विचार करने की मांग की। ज्ञापन में किसानों को डीजल, यूरिया, डीएपी सहित अन्य कृषि उपयोगी उर्वरक समय पर और पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराने की आवश्यकता बताई गई। किसानों का कहना है कि फसल सीजन के दौरान खाद और अन्य संसाधनों की कमी से खेती प्रभावित होती है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ जाती है। भाकियू (चढूनी) ने किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए कृषि ऋण माफी की मांग भी उठाई। संगठन का कहना है कि बढ़ती लागत और घटती आय के कारण किसान आर्थिक दबाव में हैं, इसलिए उन्हें राहत प्रदान की जानी चाहिए। इसके अलावा ज्ञापन में किसानों और उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य एवं शिक्षा सुविधाओं को निःशुल्क किए जाने की मांग की गई। संगठन का तर्क है कि सीमित आय वाले किसान परिवारों पर इन सेवाओं का खर्च अतिरिक्त बोझ बन रहा है। आवारा पशुओं की समस्या को भी प्रमुखता से उठाते हुए संगठन ने कहा कि खेतों और फसलों को नुकसान से बचाने के लिए सरकार को प्रभावी एवं स्थायी व्यवस्था लागू करनी चाहिए। किसानों ने इस संबंध में ठोस कार्रवाई की मांग की। भाकियू (चढूनी) पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो संगठन आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखेगा। ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन के कई पदाधिकारी और किसान मौजूद रहे।





