मुजफ्फरनगर। अपराधी किस तरह कानून की आंखों में धूल झोंकते है, इसका ताजा खुलासा पुलिस अधीक्षक नगर सत्यनारायण प्रजापत की जांच में हुआ है, जिसमें मुर्दे को जिंदा दर्शाकर मेरठ के गैंगस्टर नीरज बाबा का जमानती बना दिया गया। गैंगस्टर और जमानती कई साल तक नहीं आए तो कोर्ट ने जमानतियों के सत्यापन की जांच के आदेश दिए। एसपी प्रजापत ने मेरठ के हस्तिनपुर थाने का रिकार्ड खंगाल कर पूरी जांच पड़ताल की तो पता चला कि जमानती बनाए गए दोनों भाइयों में से एक भाई की 14 साल पहले मौत हो गई थी, जबकि दूसरे भाई ने भी गैंगस्टर की जमानत लेने से इंकार कर दिया है। एसपी ने मेरठ के एसएसपी को पूरे मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की है।
मेरठ के शातिर नीरज बाबा को खतौली कोतवाली पुलिस ने आपराधिक घटनाओं के मद्देनजर गैंगस्टर में निरुद्ध किया था। 2022 में गैंगस्टर नीरज की हस्तिनापुर के प्रताप सिंह और उसके भाई बिलख सिंह ने जमानत ली थी। पुलिस की सत्यापन रिपोर्ट आने के बाद गैंगस्टर की रिहाई हो गई थी, तब से आरोपी कोर्ट में पेश नहीं हो रहा था। गैंगस्टर कोर्ट ने नीरज बाबा के जमानतियों को कोर्ट में तलब किया, लेकिन कोई पेश नहीं हुआ। गैंगस्टर कोर्ट ने एसएसपी संजय वर्मा को जमानतियों का सत्यापन करने के आदेश दिए थे। जमानतियों के सत्यापन की जिम्मेदारी पुलिस अधीक्षक नगर सत्यनारायण प्रजापत को सौंपी गई। एसपी प्रजापत ने जांच के दौरान हस्तिनापुर थाने के जमानती सत्यापन रजिस्टर का अवलोकन किया। इसी दौरान पता चला कि जो पता दर्शाया गया है, वहां दोनों जमानती नहीं रहते। बाद में एसपी दोनों कथित जमानतियों तक पहुंच गए। सत्यापन के दौरान पूरे फर्जीवाड़े की पोल खुल गई। जमानती बनाए गए बिलख सिंह ने बताया कि प्रताप सिंह का तो 2008 में निधन हो गया था, ऐसे में 14 साल बाद वो कैसे जमानती बन सकते है, जबकि पिता ने गैंगस्टर नीरज बाबा की कभी जमानत नहीं ली। जाहिर है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर यह खेल किया गया है। एसपी सिटी सत्यनारायण प्रजापत ने गैंगस्टर कोर्ट को अपनी रिपोर्ट भेज दी है। इसके अलावा एसएसपी मेरठ से जमानतदारों के फर्जीवाडे़ की जांच अपने स्तर से कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की है।
पेशेवर जमानतियों को सूचीबद्ध करने को विशेष अभियान
मुजफ्फरनगर। गैंगस्टर के जमानत में फर्जीवाडे़ के खुलासे के बीच अपर पुलिस महानिदेशक ने पेशेवर जमानतियों को सूचीबद्ध करने के लिए एक माह का विशेष सत्यापन अभियान चलाने के निर्देश दिए है। एडीजी के आदेश में कहा गया है कि देखने में आ रहा है कि शातिर अपराधियो की जमानत में पेशेवर जमानतदारों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो बेहद चिंता का विषय है। एक माह का विशेष अभियान चलाकर पेशेवर जमानतदारों को चिन्हित किया जाए।






