खतौली। आर्य समाज शिवपुरी में अमर बलिदानी वीर शहीद गुरु तेग बहादुर का 350 व शहीदी दिवस मनाया गया। इस अवसर पर आर्य समाज के जिला प्रधान सत्येंद्र आर्य ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान कोई साधन बलिदान नहीं था। उन्होंने देश के विशेष कर कश्मीर के पंडितों को बचाने के लिए एवं वैदिक धर्म को बचाने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी, लेकिन धर्म को नहीं छोडा। यह भी उल्लेखनीय है कि उनके 9 वर्षीय पुत्र गुरु गोविंद सिंह ने उन्हें इस बलिदान के लिए आग्रह किया था और गुरु गोविंद सिंह ने अपने दो साथी भाई सती दास और भाई मतिदास को लेकर औरंगजेब के सामने प्रस्तुत हो गए। औरंगजेब ने पहले उनके शिष्यों को धर्म बदलने के लिए कहा लेकिन उन्होंने मना कर दिया तो उन्हें गर्म तेल में जलकर और आरे से चिरवा कर शहीद कर दिया और बाद में गुरु तेग बहादुर के द्वारा धर्म परिवर्तन मना करने के बाद उनके सर को धड़ से अलग कर दिया। इस तरह से औरंगजेब की क्रूरता का शिकार होकर के उन्होंने धर्म की रक्षा की।
डीडी आर्य ने बताया कि गुरु तेगबहादुर सिंह जी के पिताजी का नाम गुरु हरगोविंद सिंह और माता जी का नाम गुजरी देवी था। गुरु तेग बहादुर जी का बचपन का नाम त्यागमल था माता-पिता ने अपने बच्चों को शास्त्र और शास्त्र दोनों की शिक्षा दीक्षा बहुत अच्छे ढंग से दिलाई थी। इस अवसर पर प्रधान जगदीश सिंह, रामानंद आर्य, भगवान सिंह, धीरेंद्र आर्य, चरण सिंह आर्य, शोभाराम आर्य, राजेंद्र खारी, पूर्व स्टेशन अधीक्षक अजेश आर्य, डीडी आर्य, सुशील आर्य आदि लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रवाद एवं धर्म रक्षा का संकल्प लिया गया।






