बिहार की राजनीति में समीकरण पल-पल बदलते रहते हैं. यहां कब कौन सा दांव किसी पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हो जाए, कहना मुश्किल है. बिहार में इन दिनों जिस तरह से SIR का मुद्दा गरमाया हुआ है, उससे तो यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि फिलहाल बिहार वोटर वेरिफिकेशन पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. वहीं इसी बीच तेजस्वी यादव के चुनाव बहिष्कार के बयान के बाद अब इसके कई मायने भी निकाले जा रहे हैं. बिहार के सियासी गलियारे में इन दिनों चर्चा है कि अगर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) किसी बड़े कारण से चुनाव का बहिष्कार करने का फैसला करता है, तो इसका सीधा और सबसे बड़ा फायदा कांग्रेस को मिल सकता है.
ऐसी स्थिति में, कांग्रेस बिहार में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभर सकती है, जो बिहार में दशकों से राज्य में अपनी खोई हुई जमीन तलाश रही है. अटकलें लगाई जा रही हैं कि अगर आने वाले चुनावों में RJD कोई बड़ा फैसला लेती है जैसे कि चुनाव का बहिष्कार- तो इसका सीधा राजनीतिक फायदा कांग्रेस को मिल सकता है. कांग्रेस न सिर्फ विपक्ष के नेतृत्वकर्ता के रूप में उभर सकती है, बल्कि राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनने की दिशा में भी कदम बढ़ा सकती है.
क्या RJD चुनाव बहिष्कार की तैयारी में है?
तेजस्वी यादव के चुनाव बहिष्कार वाले बयान में कांग्रेस पार्टी अपने लिए मौका देख रही है. उसकी योजना यह है कि अगर राजद चुनाव का बहिष्कार करती है तो वह उस खाली जमीन को भरने के लिए तैयार है. ऐसे में उसके पास अपनी खोई हुई जमीन हासिल करने के लिए इससे बेहतर मौका कुछ और नहीं हो सकता है. उसकी अभी तक की चुप्पी यह बता रही है कि पार्टी इस मसले पर तेजस्वी के साथ नहीं है. वह खुद के खड़ा करने के लिए मौके की तलाश में है. ऐसे में अगर RJD यह फैसला लेती है कि वह आगामी विधानसभा चुनाव या किसी बड़े चुनावी मंच से खुद को अलग रखेगी-चाहे अस्थायी रूप से ही क्यों न हो-तो इससे पूरा सियासी समीकरण बदल सकता है.







