2022 में नई मंडी के सुभाषनगर से गायब हो गया था 10 साल का बालक
परिवार छोड चुका था उम्मीद, मानव तस्करी रोधी थाना पुलिस ने परिजनों को सौंपा बालक
मुजफ्फरनगर। तीन साल पहले सुभाषनगर से गायब हुए 10 साल के तहजूब को आखिरकार मानव तस्करी रोधी थाना पुलिस ने ढूंढ ही लिया। बालक दिल्ली के एक होम सेंटर में शरण लिए था। थक हारकर परिवार तो उसकी वापसी की उम्मीद ही छोड़ चुका था, लेकिन अब उसे अपने बीच पाकर परिवार के सदस्यों के चेहरे खिल गए। एसएसपी संजय वर्मा ने पुलिस टीम को पुरस्कृत करने की घोषणा की है।
नई मंडी कोतवाली क्षेत्र के सुभाषनगर निवासी युनुस का 10 साल का बेटा तहजूब 3 दिसंबर को अचानक गायब हो गया था। काफी तलाश करने के बाद कोई सुराग नहीं लगा तो नई मंडी कोतवाली में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी, जो कागजों में ही चलती रही। एसएसपी की समीक्षा में यह मामला आया तो नई मंडी से तहजूब के मामले की विवेचना इस साल मार्च माह में मानव तस्करी रोधी थाने को स्थानांतरित कर दी गई। एसपी क्राइम इंदू सिद्धार्थ की देखरेख में इंस्पेक्टर सर्वेश कुमार की अगुवाई में तहजूब की तलाश शुरू हुई। टीम ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली के होम सेंटरों में तहजूब की तलाश शुरू की। छह माह की भागदौड़ के बाद आखिर कर तहजूब को दिल्ली से एक होम सेंटर में ढूंढ़ लिया गया। तहजूब को दिल्ली के कश्मीरी गेट पर घूमते हुए रोका गया था। बाद में सीडब्लूसी के माध्यम से तहजूब को सेंटर होम भेज दिया गया था।
इंस्पेक्टर सर्वेश कुमार ने बताया कि लंबा समय बीत जाने के कारण परिवार तो परिवार तो लगभग उसकी वापसी की उम्मीद छोड़ चुका था, मगर मानव तस्करी रोधी थाना पुलिस ने उसे दिल्ली से खोजकर अपनों से मिला दिया। उन्होंने बताया कि टीम ने इसके लिए कई माह तक भागदौड़ की थी। लगातार निराशा मिलने के बाद भी तहजूब की तलाश में टीम लगी रही। तहजूब को पाकर परिवार के चेहरे खिल गए। युनुस के छह बच्चे बताए गए है। एसपी क्राइम इंदू सिद्धार्थ ने इस सराहनीय कार्य के लिए पुलिस टीम की पीठ थपथपाई है।






