जानसठ। कस्बा जानसठ में पिछले 125 वर्षों से निरंतर रामलीला का मंचन किया जा रहा है। कस्बे के मोहल्ला मिश्रान स्थित यह रामलीला आसपास के क्षेत्र की सबसे प्राचीन रामलीला मानी जाती है, जिसकी विशेषता है कि यहां आज भी स्थानीय कलाकार ही मंचन करते हैं।
गुरुवार की रात रामलीला मंच पर सीता स्वयंवर की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। मंचन के दौरान महाराजा जनक ने जब देखा कि कोई भी राजा भगवान शिव के धनुष को हिला तक नहीं सका तो उन्होंने सभा में कह दिया कि पृथ्वी वीरों से खाली हो चुकी है। इस पर लक्ष्मण जी ने जनक की बात का विरोध करते हुए कहा कि जिस सभा में श्रीराम जैसे पराक्रमी बैठे हों, वहां ऐसा कहना अनुचित है। विश्वामित्र की आज्ञा से श्रीराम ने जैसे ही धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास किया, वह टूट गया। उसी क्षण सभा में मौजूद सैकड़ों दर्शक जय श्रीराम के नारों से गूंज उठे और भगवान राम-सीता का विवाह संपन्न हुआ। इसके बाद परशुराम का प्रवेश हुआ और उन्होंने धनुष तोड़ने वाले को मृत्युदंड देने की बात कही। इस पर लक्ष्मण और परशुराम के बीच हुआ संवाद देखकर उपस्थित श्रदालु भाव-विभोर हो गए। समाजसेवी रजनीश सैनी ने सीता स्वयंवर के उपरांत श्रद्धालुओ में प्रसाद वितरित कराया। समिति अध्यक्ष निशांत कांबोज ने बताया कि इस वर्ष रामलीला का 125वां वर्ष बड़े धूमधाम से मनाया जा रहा है। शुक्रवार की दोपहर नगर के मुख्य मार्गों से भगवान श्रीराम की बारात निकाली जाएगी, जिसका शुभारंभ रजनीश सैनी करेंगे। इस अवसर पर तुराज गुर्जर, विकास मुल्तानी, अश्वनी अग्रवाल, शिवकुमार, हर्ष चैधरी, अनिल चैधरी, संदीप सैनी, उमाशंकर शर्मा, सोनी गुर्जर, अमित शर्मा, प्रमोद कुमार, गोपाल सैनी, संरक्षक वेद प्रकाश सैनी, निर्देशक रामअवतार शर्मा, महंत रतन सिंह राजपूत, आशीष भारद्वाज, बलराज सैनी, ठाकुर प्रदीप राणा, अमरजीत सैनी, सुमित, श्यामबाबू, अनिल, ज्ञानचंद सैनी, अशोक राजपूत, रचित, वीपी सिंह, लवी सैनी, यशदीप शर्मा, शालू वालिया सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।







