मुजफ्फरनगर। शहर में सोमवार को लगे जाम ने आम जनता की जान निकाल दी। सुबह से ही यातायात का दबाव था, लेकिन स्कूलों की छुट्टी ने वाहनों के पहियों को जाम कर दिया। जाम में फंसे बुजुर्ग, महिलायें और बच्चे बिलखते रहे। यातायात पुलिस जाम के आगे बेबस नजर आई। बाद में कुछ लोगों ने खुद सड़कों पर उतरकर व्यवस्था संभाली, तब जाकर वाहनों का रेंगना शुरू हुआ। बड़ी बात यह है कि हर सोमवार को जाम नियति बन चुका है, लेकिन यातायात पुलिस के पास जनमानस को निजात दिलाने को कोई प्लान नहीं है।
मुजफ्फरनगर शहर में जाम लंबे समय से जनमानस से जी का जंजाल बना हुआ है। इसके लिए जनप्रतिनिधियों की बेरूखी और यातायात पुलिस में इच्छा शक्ति की कमी भारी पड़ रही है, क्योंकि जाम न लगे, इसके लिए किसी कार्ययोजना पर काम नहीं हो पाया है। शहर में रविवार को अवकाश सोमवार को जाम लगना एक परंपरा बन गई है। आज भी ऐसा ही हुआ। वैसे तो सुबह से यातायात का दबाव था, लेकिन दोपहर के समय हुई स्कूली की छुट्टी से हालात को बद से बदतर बना दिया। देखते ही देखते शहर में हर तरफ जाम लगने के कारण वाहनों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई। सबसे बुरा हाल महावीर चैक से लेकर टिकैत चैक तक रहा। यहां तो वाहनों के आमने-सामने आ जाने से सैंकडों वाहन काफी देर तक फंसे रहे। ऐसी ही हालत मालवीय चैक, बचन सिंह काॅलोनी और सदर बाजार में बनी रही। यहां भी स्कूली बच्चों के साथ काफी वाहन जाम में फंसे रहे।
अंसारी रोड, घास मंडी, अस्पताल चैक और शिव चैक पर रूक-रूक कर जाम लगता रहा। जाम में सबसे ज्यादा दिक्कत स्कूली बच्चों को हुई, क्योंकि वो पसीना-पसीना थे। ऐसा भी नहीं था कि यातायात पुलिस जाम खुलवाने का प्रयास नहीं कर रही थी, लेकिन एक दूसरे से आगे निकलने की होड जाम को बढ़ाने में सबसे ज्यादा मददगार रही। कई स्थानों पर आम लोगों ने सड़कों पर उतरकर यातायात सुचारू कराया। सबसे बडा सवाल यह है कि हर सोमवार को लगने वाले जाम से निजात दिलाने के लिए आखिर क्यों काम नहीं हो रहा है।







