मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश उत्तराखंड चिकित्सा एवं विक्रय प्रतिनिधि संघ, जो फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया से संबद्ध है, ने श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख एल. मंडाविया को जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से ज्ञापन भेजा।
ज्ञापन में संघ ने सेल्स प्रमोशन कर्मचारियों की सेवा शर्तों और कार्य परिस्थितियों से जुड़ी गंभीर समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि बहुराष्ट्रीय और भारतीय दवा कंपनियों में बड़े पैमाने पर छंटनी से हजारों कर्मचारियों की नौकरियाँ चली गई हैं। इसके साथ ही डिजिटल माध्यम से थोपे जा रहे नए कार्य नियम कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव डाल रहे हैं। संघ ने कहा कि 10 अगस्त 2017 को नई दिल्ली में श्रम शक्ति भवन में आयोजित औद्योगिक त्रिपक्षीय समिति की बैठक में वैधानिक कार्य नियम बनाने का निर्णय लिया गया था, लेकिन 8 वर्ष बीत जाने के बाद भी इन नियमों को अधिसूचित नहीं किया गया। इस कारण कर्मचारियों को प्रतिकूल परिस्थितियों में काम करना पड़ रहा है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि विक्रय संवर्धन कर्मचारी (सेवा शर्तें) अधिनियम 1976 अब नए श्रम संहिता में समाहित होकर समाप्त हो गया है, जिसके चलते नियोक्ता मनमाने निजी नियम लागू कर रहे हैं। वहीं, डीजीएचएस के हालिया आदेश से अस्पतालों और संस्थानों में चिकित्सा प्रतिनिधियों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगने से कर्मचारियों की नौकरियाँ और अधिक संकट में आ गई हैं। संघ ने मांग की कि 1976 के अधिनियम की धारा 12 के तहत सेल्स प्रमोशन कर्मचारियों के लिए वैधानिक कार्य नियम बनाए जाएँ। चारों श्रम संहिताओं को समाप्त कर पूर्ववर्ती श्रम कानूनों को बहाल किया जाए। औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 की धारा 2 (जे) लागू कर विक्रय संवर्धन को उद्योग घोषित किया जाए। चिकित्सा प्रतिनिधियों को अस्पतालों और संस्थानों में निर्बाध प्रवेश सुनिश्चित किया जाए। संघ ने केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर लाखों की नौकरियाँ बचाने और उन्हें बेहतर सेवा शर्तें उपलब्ध कराने की अपील की है।






