मुजफ्फरनगर। सरकार की कर नीतियों और विभागीय कार्यप्रणाली से नाराज़ व्यापारियों ने सोमवार को व्यापार कर विभाग की बैठक में जमकर विरोध दर्ज कराया। बैठक की अध्यक्षता जॉइंट कमिश्नर व्यापार कर विभाग राम प्रसाद ने की। बैठक सिटी सेंटर स्थित विभागीय कार्यालय में आयोजित हुई। इस बैठक में शहर के सभी प्रमुख व्यापारी नेता मौजूद रहे।
बैठक के दौरान व्यापारी नेता प्रमोद मित्तल और पवन बंसल ने आपत्ति जताते हुए कहा कि पूर्व की सरकारों में व्यवस्था थी कि एसआईबी अधिकारी बिना डीएम की अनुमति के सर्वे नहीं कर सकते थे और जॉइंट कमिश्नर के लिखित आदेश के बिना डिप्टी कमिश्नर सर्वे नहीं कर सकते थे, लेकिन वर्तमान में मात्र शिकायत मिलते ही विभाग बिना जांच पड़ताल के सीधे कार्रवाई कर देता है, जिससे व्यापारियों में आक्रोश है। व्यापारी नेता संजय मित्तल ने सवाल उठाया कि जब जीएसटी रजिस्ट्रेशन के समय विभागीय अधिकारी मौका-मुआयना करके ही पंजीकरण प्रदान करते हैं, तो उसके बाद दुकानों पर दोबारा सर्वे का क्या औचित्य है? यदि व्यापारी किसी कारणवश दुकान पर मौजूद न मिले तो रिपोर्ट में यह दर्ज कर दिया जाता है कि पंजीकृत व्यापारी यहां व्यवसाय नहीं करता, जो पूरी तरह गलत है। व्यापारी नेता मोहन तायल ने आरोप लगाया कि सरकार ने कुछ वस्तुओं पर जीएसटी कम कर दी है, लेकिन व्यापारी के पास पहले से मौजूद स्टॉक 18 प्रतिशत टैक्स देकर खरीदा गया था। अब उस पर 5 प्रतिशत जीएसटी लागू है। ऐसे में 13 प्रतिशत का अंतर विभाग के पास जमा है, जिसे कब और कैसे लौटाया जाएगा, इस पर कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। उन्होंने इसे व्यापारियों के साथ सीधा अन्याय बताया।व्यापारियों ने कहा कि विभाग लगातार शोषण कर रहा है और समस्याओं के समाधान का कोई ठोस विकल्प अधिकारियों के पास नहीं है। इसी नाराज़गी के चलते व्यापारियों ने सामूहिक रूप से बैठक का बहिष्कार कर दिया और वहां से उठकर चले गए। इस विरोध बैठक में मुख्य रूप से प्रमोद मित्तल, भूपेंद्र गोयल, राहुल गोयल, संजय मित्तल, पवन बंसल, मोहन तायल, कृष्ण गोपाल मित्तल, शलभ गुप्ता, अजय सिंगल, दिनेश बंसल, अनिल तायल सहित कई व्यापारी नेता मौजूद रहे। सभी ने सरकार की नीतियों और विभागीय रवैये के खिलाफ खुलकर नाराज़गी जताई। कुल मिलाकर, विभाग की इस बैठक में व्यापारी न केवल असंतुष्ट नजर आए बल्कि उन्होंने यह साफ कर दिया कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तब तक वे सरकार और विभाग की नीतियों का विरोध जारी रखेंगे।






