मुजफ्फरनगर। सड़कों में गड्ढे और गड्ढों में पानी मुजफ्फरनगर शहर की इन दिनों बस यही कहानी है। पूरे शहर में तस्वीरें ऐसी ही है, जहां गड्ढे पालिका पर भारी है। गड्ढे तो पहले भी थे, लेकिन बारिश ने उन्हें इतना गहरा बना दिया, वहां दुर्घटना में कब किसी की जिदंगी स्वाह हो जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता है। टूटी सडकों ने निर्माण कार्यो में हुए खेल की भी पोल खोलकर रख दी है। शायद पालिका प्रशासन की निंद्रा किसी हादसे के बाद ही टूटने वाली है। भाजपा की ट्रिपल इंजन की सरकार बनने के बाद भी शहर में कुछ खास बदलाव देखने को नहीं मिला है। योगी सरकार तमाम घोषणाओं के भी बावजूद शहर कभी गड्ढों से मुक्त नहीं हो पाया है। ये तस्वीर किसी खास इलाके की नहीं है, बल्कि पूरे शहर में हालात एक ही जैसे है। पिछले कुछ दिनों से रूक-रूक कर हो रही बारिश ने हालात को और बद-से-बदतर बना दिया है। शहर के बीचोबीच रेलवे रोड का सबसे ज्यादा बुरा हाल है। रोजमर्रा लाखों यात्री यहां से होकर गुजरते है। पुलिस और प्रशासन के अफसरों का भी रोजमर्रा इस मार्ग से गुजरना होता है, लेकिन कोई सुध लेने वाला नहीं है। रेलवे स्टेशन के दूसरे गेट के सामने सीवर में कई माह से बना गड्ढा हादसों का दावत दे रहा है। गांधी काॅलोनी और पचैंड़ा रोड पर गड्ढों की लंबी लाइन है। पंजाबी बारात घर के सामने तो जानलेवा गड्ढे बने हुए है। विश्वकर्मा चैक से जानसठ बस स्टैंड, मालवीय चैक, परिक्रमा मार्ग, सरकुलर रोड, भोपा पुल, अंसारी रोड, रूड़की रोड, इंदिरा काॅलोनी आदि इलाकों की तस्वीर भी ऐसी है। यहां कब बड़ी दुर्घटना हो जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता है। पालिका प्रशासन अब यह कहकर पल्ला झाड़ रहा है कि बारिश के बाद इन गड्ढों को भरने का काम तेजी से होगा। फिलहाल शहर में जगह-जगह बने गड्ढे आम लोगों के मुसीबत का सबब बने है।









