मुजफ्फरनगर। जनपद में संरक्षित वन भूमि पर कथित रूप से हो रहे अवैध और भ्रष्टाचारपूर्ण कार्यों को लेकर जाट महासभा ने कड़ा रुख अपनाया है। संगठन ने जिला वन अधिकारी को एक ज्ञापन सौंपकर वन विभाग की एक इकाई एवं संबंधित कंपनियों पर नियमों की अनदेखी करते हुए अवैध कार्य कराने का गंभीर आरोप लगाया है।
जाट महासभा के जिला अध्यक्ष धर्मवीर बालियान ने बताया कि बीते कुछ समय से संरक्षित वन क्षेत्र में बिना वैध अनुमति टेलीफोन व केबल लाइनें बिछाई जा रही हैं। इसके साथ ही निर्धारित अनुमति से कहीं अधिक संख्या में पेड़ों की कटाई कराई जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जहां केवल 10 पेड़ों के कटान की अनुमति होती है, वहां 50 या उससे अधिक पेड़ काटे जा रहे हैं, जो वन अधिनियम और पर्यावरण संरक्षण कानूनों का खुला उल्लंघन है। महासभा का कहना है कि इस विषय में पूर्व में जिला वन अधिकारी से टेलीफोन पर भी शिकायत की गई थी, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आई। संगठन का दावा है कि उनके पास कई स्थानों के प्रत्यक्ष प्रमाण मौजूद हैं, जहां संरक्षित वन भूमि में लाइनें डाली जा चुकी हैं, गड्ढे खुले हुए हैं और मशीनें कार्यरत पाई गई हैं। आवश्यकता पड़ने पर संगठन इन स्थलों को मौके पर दिखाने के लिए भी तैयार है। जाट महासभा ने मांग की है कि संरक्षित वन भूमि में हुए सभी अवैध कार्यों की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही इस प्रकरण में संलिप्त अधिकारियों, कर्मचारियों और संबंधित कंपनी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की जाए तथा पर्यावरण को हुई क्षति के लिए संबंधित कंपनी से हर्जाना वसूला जाए। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो जाट महासभा को जनहित में आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। ज्ञापन देने के दौरान महासचिव जयवीर सिंह और कोषाध्यक्ष राकेश बालियान सहित अन्य लोग मौजूद रहे।






