मुजफ्फरनगर। महिलाओं की सुरक्षा, स्वावलंबन और सशक्तिकरण के उद्देश्य से मिशन शक्ति अभियान के अंतर्गत मंगलवार को जिला पंचायत सभागार में “शक्ति संवाद” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न स्कूलों एवं कॉलेजों की छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और महिला सुरक्षा, आत्मनिर्भरता एवं शिक्षा से जुड़े सवाल अधिकारियों से पूछे।
कार्यक्रम में छात्राओं ने अपनी जिज्ञासाएं रखीं। भगवंती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज की छात्रा अनन्या ने प्रशासन से प्रश्न किया कि स्कूलों में आत्मरक्षा की कक्षाएं अनिवार्य क्यों नहीं कराई जातीं? इस पर जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने कहा कि शारीरिक रूप से सशक्त होने के साथ-साथ छात्राओं को मानसिक रूप से भी मजबूत होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आत्मरक्षा की ट्रेनिंग जितनी जरूरी है, उतनी ही जरूरी मानसिक दृढ़ता भी है, क्योंकि मजबूत सोच ही जीवन में हर मुश्किल से लड़ने की शक्ति देती है।
एक अन्य छात्रा ने सवाल किया कि यदि किसी क्षेत्र में मेहनत करने के बावजूद सफलता न मिले तो क्या दिशा बदल लेनी चाहिए? जिलाधिकारी ने इस पर प्रेरणादायक जवाब देते हुए कहा खुद तय करें कि क्या बनना है। शिक्षक केवल पढ़ाता नहीं, बल्कि बच्चे को पढ़ता भी है। शिक्षक बच्चे की क्षमताओं को पहचान कर उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करे। सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। मेहनत का कोई विकल्प न था, न है, न कभी होगा। इस अवसर पर उपस्थित छात्राओं ने महिला सुरक्षा, सरकारी योजनाओं की जानकारी, और अपने अधिकारों को लेकर कई सवाल रखे, जिनका उत्तर जिलाधिकारी के साथ-साथ एसपी क्राइम डॉ. इंदु सिद्धार्थ और गीता शर्मा ने भी विस्तार से दिया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना सहित महिलाओं से जुड़ी अन्य कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गई। अधिकारियों ने छात्राओं से आह्वान किया कि वे स्वयं के अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और दूसरों को भी जागरूक करें।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्राएं, शिक्षिकाएं, महिला अधिकारी एवं समाजसेवी उपस्थित रहीं। “शक्ति संवाद” के माध्यम से छात्राओं ने न केवल अपनी जिज्ञासाएं साझा कीं, बल्कि आत्मविश्वास और सशक्तिकरण का एक सशक्त संदेश भी दिया।







