मुजफ्फरनगर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाई कोर्ट बेंच की स्थापना की मांग को लेकर चल रहा करीब 55 वर्षों पुराना आंदोलन अब निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। इसी क्रम में बुधवार 17 दिसंबर को जनपद मुजफ्फरनगर में अधिवक्ताओं के आह्वान पर “महाबंद” रखा गया, जिसका व्यापक असर देखने को मिला। अधिवक्ताओं के साथ व्यापार संगठनों ने भी खुलकर समर्थन किया और प्रमुख बाजार पूरी तरह बंद रहे।
महाबंद को सफल बनाने के लिए जिला बार संघ और सिविल बार संघ के नेतृत्व में हजारों अधिवक्ता कचहरी परिसर से नारेबाजी करते हुए शिव चौक पहुंचे। इसके बाद अधिवक्ताओं और व्यापारियों ने संयुक्त रूप से शहर के प्रमुख बाजारों भगत सिंह रोड, झांसी की रानी चौक, एसडी मार्केट, रुड़की रोड, टाउन हॉल रोड, आर्य समाज रोड, मीनाक्षी चौक आदि में दुकानें बंद कराईं। पूरे शहर में बंद का व्यापक असर रहा और आम जनमानस ने भी आंदोलन के प्रति समर्थन जताया।दरअसल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों को न्याय के लिए प्रयागराज (इलाहाबाद) स्थित हाई कोर्ट जाना पड़ता है, जो सैकड़ों किलोमीटर दूर है। लंबी दूरी, समय और खर्च के कारण न्याय प्रक्रिया आम नागरिक के लिए महंगी और कठिन हो जाती है। इसी समस्या को देखते हुए दशकों से अधिवक्ता हाई कोर्ट बेंच की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक यह मांग पूरी नहीं हो सकी है। सरकारों की उपेक्षा से क्षुब्ध अधिवक्ताओं का यह आंदोलन अब जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने “हाई कोर्ट बेंच हमारा अधिकार है” और “पश्चिम यूपी को न्याय चाहिए” जैसे नारों के साथ सरकार से तत्काल निर्णय लेने की मांग की। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि जल्द मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। हाई कोर्ट बेंच की मांग को लेकर हुआ यह महाबंद न केवल अधिवक्ताओं की एकजुटता का प्रतीक बना, बल्कि यह संकेत भी दे गया कि अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश की यह पुरानी मांग अनदेखी नहीं की जा सकती।
सस्ता और सुलभ न्याय के लिये बैंच आवश्यक
मुजफ्फरनगर। जिला बार संघ के महासचिव चंद्रवीर सिंह ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के नागरिकों को न्याय पाने के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट जाना पड़ता है, जिससे सस्ता और सुलभ न्याय केवल एक नारा बनकर रह गया है। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट बेंच की स्थापना से न केवल आम जनता को राहत मिलेगी, बल्कि न्यायिक व्यवस्था भी मजबूत होगी। जिला बार संघ के महासचिव चंद्रवीर सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राजनीतिक वर्चस्व कमजोर होने के कारण यह मांग अब तक अधूरी है। उन्होंने कहा कि आने वाले चुनावों में पश्चिम यूपी की जनता उसी प्रत्याशी को समर्थन देगी, जो हाई कोर्ट बेंच की मांग को सदन में मजबूती से उठाने का वादा करेगा।









