मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (उपाम), लखनऊ में सोमवार को जिला निर्वाचन अधिकारियों एवं निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को निर्वाचक नामावली से संबंधित विधिक प्रावधानों और तकनीकी पहलुओं पर विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
प्रशिक्षण सत्र में कुल 8 जिला निर्वाचन अधिकारी एवं 137 निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी शामिल हुए। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि हर पात्र नागरिक का नाम निर्वाचक नामावली में दर्ज होना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने निर्वाचक नामावली को पारदर्शी, त्रुटिरहित और समावेशी बनाने पर जोर दिया।प्रशिक्षण में अधिकारियों को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम 1960 तथा मैनुअल ऑन इलेक्टोरल रोल 2023 में उल्लिखित विधिक दायित्वों की जानकारी दी गई। इसके अलावा बीएलओ और सुपरवाइजरों के साथ समन्वय, दावे-आपत्तियों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण, ईआरओ नेट और बीएलओ ऐप के उपयोग, फील्ड अनुश्रवण, एनजीएसपी पोर्टल पर शिकायतों के निस्तारण और मीडिया व सोशल मीडिया की भूमिका पर भी चर्चा हुई। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने निर्देश दिए कि प्रशिक्षित ईआरओ अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में अधीनस्थ बीएलओ और सुपरवाइजरों को छोटे-छोटे समूहों में प्रशिक्षित करें। उन्होंने लिंगानुपात असंतुलित मतदेय स्थलों की पहचान कर वहां विशेष कार्ययोजना के तहत जागरूकता अभियान चलाने और 18-19 आयु वर्ग के युवाओं को निर्वाचक नामावली में शामिल करने पर बल दिया। सत्र में वर्ष 2003 की निर्वाचक नामावली को वर्ष 2025 की निर्वाचक नामावली के साथ मैपिंग की प्रक्रिया समझाई गई। बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर गणना-प्रपत्र वितरित करने, मतदाता सत्यापन और उसे ऐप पर अपलोड करने की प्रक्रिया से भी अधिकारियों को अवगत कराया गया। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार अपमार्जन संबंधी कार्यवाही करते हुए उससे संबंधित सभी अभिलेख सुरक्षित रखने के भी निर्देश दिए गए। साथ ही जिले के सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों, सुपरवाइजरों और बूथ लेवल अधिकारियों को भी विधिक प्रावधानों व प्रक्रियाओं से अवगत कराने के आदेश दिए गए।







