मुजफ्फरनगर। शिव सेना (शिंदे गुट) व क्रान्ति सेना ने मंगलवार को संयुक्त रूप से जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपकर जनपद में बड़े पैमाने पर चल रहे नशीले पदार्थों व नशीली दवाओं के कारोबार पर कड़ी कार्यवाही की मांग की।
ज्ञापन में कहा गया कि जिले में मेडिकल स्टोर, परचून की दुकान और यहां तक कि पान की दुकानों पर भी खुलेआम नशीले इंजेक्शन, दवाएं और अन्य पदार्थ बेचे जा रहे हैं। इस गोरखधंधे के पीछे बड़े माफियाओं का हाथ है, जो बेरोजगार युवाओं के नाम पर मेडिकल स्टोर का लाइसेंस बनवाकर उन्हें मामूली किराये पर लेकर नशे का अवैध कारोबार चला रहे हैं।शिव सेना ने उदाहरण देते हुए कहा कि बीते वर्ष रामपुरी निवासी हेमंत शर्मा के नाम पर अक्षय शर्मा ने दवा बेचने की फर्म बनाई और उसे 5 हजार रुपये मासिक किराए पर लेकर नशीली दवाओं का व्यापार शुरू कर दिया। मामला उजागर होने पर एनसीबी ने छापेमारी कर बड़ी मात्रा में नशीली दवाएं बरामद कीं। लेकिन असली आरोपी अक्षय शर्मा व अन्य फरार हो गए जबकि निर्दोष हेमंत शर्मा जेल की सलाखों के पीछे चला गया। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि इस कारोबार के पीछे रामपुरी निवासी सुबोध शर्मा, अक्षय शर्मा, गौरव शर्मा सहित कई बड़े लोग शामिल हैं। इसके अलावा जिला चिकित्सालय के सामने स्थित अरोरा मेडिकल स्टोर पर भी आरोप लगाया गया कि वह मोटी रकम लेकर युवाओं को एक्सपीरियंस लेटर उपलब्ध कराता है ताकि उनके नाम पर लाइसेंस जारी हो सके। नेताओं ने कहा कि इन ड्रग्स माफियाओं के कारण गली-गली में नशे का धंधा फल-फूल रहा है और युवा-युवतियां नशे की हालत में सड़कों पर घूमते देखे जा सकते हैं। इसके बावजूद अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। शिव सेना और क्रान्ति सेना ने मांग की कि इस पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषियों को सार्वजनिक किया जाए, उनके अवैध धंधे से अर्जित सम्पत्तियों पर बुलडोजर चलाया जाए और इस कारोबार के चलते जेलों में बंद निर्दोष युवकों की रिहाई सुनिश्चित की जाए।ज्ञापन सौंपने वालों में शरद कपूर (मण्डल अध्यक्ष क्रान्ति सेना), बिट्टू सिखेड़ा (जिला प्रमुख शिव सेना), देवेन्द्र चौहान (महानगर प्रमुख क्रान्ति सेना) और आकार ओमकार पंडित (महानगर अध्यक्ष शिव सेना) शामिल रहे।






