मुजफ्फरनगर। जुर्म की दुनिया में शीर्ष पर रहे माफिया सरगना नफीस अंसारी और संजीव जीवा की तरह ही वेस्ट माफिया के बडे अपराधी रहे विनय त्यागी उर्फ िंटूक के काले अध्याय का अंत गोली से ही हुआ। तीन दिन पहले लक्सर में पुलिस अभिरक्षा में घायल हुए टिंकू ने शनिवार सुबह )षिकेश के एम्स में दम तोड दिया। ढाई दशक तक अपराध से जुड़े रहे विनय त्यागी ने हनक से एक छत्र राज चलाया था। इसी दौरान राजनैतिक चोला भी पहना और दो बार अपनी पत्नी को पुरकाजी ब्लाक का प्रमुख बनाने में कामयाब रहे। त्यागी के खिलाफ 60 से अधिक मुकदमे दर्ज होने के साथ एक लाख का ईनाम भी रहा।
मूल रूप से पुरकाजी के खाईखेड़ा गांव के विनय त्यागी का युवा काॅल मेरठ में ही बीता। छात्र जीवन से उसकी दबंगई जगजाहिर हो गई थी। झगड़ों के अलावा विनस त्यागी का नाम पुलिस रिकार्ड में सबसे पहले 1996 में आया था। वो भी माफिया नफीस अंसारी, संजीव जीवा, विक्की त्यागी की तरह जुर्म की दुनिया में छाया रहा। दिल्ली से लेकर देहरादून तक विनय ने जो चाहा, वो किया। मायावती शासन काल में एक लाख का ईनाम होने के बाद विनय त्यागी पुलिस की आंखों में धूल झोंककर जेल चला गया। 2004 के दौर में विनय ने अपराध की दुनिया छोड़कर राजनैतिक चोला पहना था। इसके बाद विनय त्यागी ने अपने गांव को राजनीति कर्म स्थली बना लिया था। इसी दौरान वो अपनी पत्नी को दो बार पुरकाजी ब्लाक की प्रमुख बनाने में कामयाब रहा। पुरानी कहावत चोर चोरी से जाए, लेकिन हेराफेरी से नहीं। विनय त्यागी ने हनी टेप के जरिए देहरादून के प्रेमनगर इलाके में एक व्यवसायी का अपहरण कर सनसनी फैला दी थी। इसके बाद मुजफ्फरनगर के पुरकाजी, नई मंडी कोतवाली में भी उसके खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए।
देहरादून की नेहरू काॅलोनी पुलिस ने सितंबर माह में गैंगस्टर विनय त्यागी को 30 सितंबर को गिरफ्तार किया था। इसक बाद विनय को दून जेल से रूडकी जेल शिफ्ट कर दिया गया था। 24 दिसंबर को विनय त्यागी को पुलिस अभिरक्षा में लक्सर ले जाया जा रहा था। इसी दौरान दो बदमाशों ने उन पर गोलियां बरसा दी। कई गोली लगने के कारण विनय को एम्स में भर्ती कराया गया था, शनिवार सुबह उसकी मौत हो गई। विनय त्यागी आईसीयू में वेंटिलेटर पर थे। गैंगस्टर विनय त्यागी उर्फ टिंकू पर यूपी और उत्तराखंड के विभिन्न थानों में 60 के करीब मुकदमे बताए गए हैं। आरोपी का मेरठ गाजियाबादए नोएडा और देहरादून में प्राॅपर्टी के विवादित मामलों में दखल रहा। सियासत के मैदान में उतरने ख्वाहिश रही। पत्नी को दो बार पुरकाजी ब्लाॅक से प्रमुख भी बनवा दिया। सहारनपुर की देवबंद सीट से खुद भी विधानसभा का चुनाव लड़ा था।






