मुजफ्फरनगर। शहर में बुधवार को एक सनसनीखेज मामला सामने आया, जब उद्योग जगत से जुड़े प्रतिष्ठित संगठन आईआईए ;इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशनद्ध के समस्त पदाधिकारी एवं सदस्य जीएसटी विभाग के ज्वाइंट कमिश्नर सि(ेश दीक्षित से मिलने उनके कार्यालय पहुंचे और वहां एक वरिष्ठ अधिकारी पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। ज्वाइंट कमिश्नर सिद्धेश दीक्षित का घेराव करते हुए उद्यमियों ने आरोप लगाया कि विभाग का ही एक अधिकारी, उद्यमियों द्वारा दाखिल किए गए जीएसटी रिटर्न की गोपनीय जानकारी के आधार पर छापामार कार्रवाई की धमकी देकर और इस कार्रवाई को रोकने के बदले 50 लाख रुपये की रिश्वत की मांग कर रहा है। उद्यमियों ने बताया कि जैसे ही इस गंभीर मामले की जानकारी संगठन के भीतर फैली, आईआईए ने बैठक कर इस विषय में सामूहिक रूप से आगे कदम उठाने का निर्णय लिया, लेकिन उसी दौरान जीएसटी विभाग के ही एक अन्य अधिकारी ने आईआईए अध्यक्ष को एक नोटिस भेज दिया। उद्यमियों का कहना है कि यह नोटिस पूरी तरह से अधिकार क्षेत्र से बाहर था और इससे स्पष्ट होता है कि विभाग के कुछ अधिकारी इस प्रकरण में आपसी मिलीभगत से काम कर रहे हैं। ज्वाइंट कमिश्नर से की गई खुली बातचीत में उद्यमियों ने विभागीय भ्रष्टाचार पर सवाल खड़े किए और मांग की कि आरोपी अधिकारी के खिलाफ तत्काल जांच और कार्रवाई की जाए। ज्वाइंट कमिश्नर सि(ेश दीक्षित ने प्रतिनिधि मंडल को आश्वासन दिया कि मामला गंभीर है और आरोपी अधिकारी के खिलाफ वरिष्ठ अधिकारियों को रिपोर्ट भेज दी गई है। दोषी होने पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस मौके पर विपुल भटनागर, नीरज केडिया, अश्वनी खंडेलवाल, पवन गोयल, सुधीर अग्रवाल, राहुल मित्तल, अरविंद मित्तल, अनुराग, मनोज अरोड़ा समेत कई उद्यमी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि यदि भ्रष्टाचार पर समय रहते अंकुश नहीं लगाया गया, तो यह पूरे व्यवसायिक वातावरण के लिए घातक होगा। इस घटनाक्रम ने विभागीय कार्यप्रणाली और व्यापारियों के साथ किए जा रहे व्यवहार को लेकर एक बार फिर प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया है। अब देखना यह होगा कि जीएसटी विभाग अपने ही अधिकारी पर लगे इतने गंभीर आरोपों पर कितनी निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई करता है।







