पुरकाजी। क्षेत्र के कई गुड़ कोल्हुओं पर पारंपरिक ईंधन की जगह प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट पदार्थ जलाए जा रहे हैं, जिससे जहरीला धुआं फैलकर लोगों की सेहत और आसपास की फसलों को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है। ग्रामीणों द्वारा विरोध और शिकायत किए जाने के बावजूद यह अवैध गतिविधि थमने का नाम नहीं ले रही है।
ग्रामीणों के अनुसार पहले गुड़ कोल्हुओं में ईंधन के रूप में खोई का इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन अब कोल्हू मालिक सस्ते और आसानी से उपलब्ध विकल्प के रूप में प्लास्टिक पन्नी, रैक्सीन और अन्य कचरे को जला रहे हैं। इससे निकलने वाला काला और जहरीला धुआं आसपास के गांवों में फैलकर सांस संबंधी बीमारियों को बढ़ावा दे रहा है। बताया गया कि करीब 15 दिन पहले ग्रामीणों ने कोल्हुओं पर प्लास्टिक जलाने का विरोध किया था, लेकिन कुछ दिनों की रोक के बाद फिर से खुलेआम प्लास्टिक और अपशिष्ट जलाकर प्रदूषण फैलाया जा रहा है। इसका असर खेतों की फसलों पर भी साफ दिखाई देने लगा है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रदूषण फैलाने वाले कोल्हुओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और पारंपरिक व पर्यावरण-अनुकूल ईंधन के उपयोग को अनिवार्य कराया जाए, ताकि क्षेत्र को जहरीले धुएं से बचाया जा सके।






