सरेआम हादसों को न्यौता दे रहे डग्गामार और ओवरलोड वाहनों को लेकर क्यों चुप है परिवहन अधिकारी
डग्गामार वाहनों से वहलना चैक पर ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों की बल्ले-बल्ले, शामली रोड पर हालत से बद से बदतर
सीटों से कई गुना अधिक यात्री भरकर सड़क पर दौड़ाए जा रहे वाहन
मुजफ्फरनगर। शहर से लेकर देहात तक दौड रहे डग्गामार वाहनों का रेला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेशों की खिल्ली उडा रहा है। शहर के बीचोबीच से डग्गामार वाहन सीटों से अधिक यात्रियों को खिडकियों आदि पर लटकाकर हादसों को दावत दे रहे है। आरटीओ विभाग तो पूरी तरह आंखें मंूदे बैठा, लेकिन सडक पर डयूटी करने वाले पुलिसकर्मी भी डग्गामार वाहनों की अनदेखी कर अपनी जेबों को गर्म कर रहे है। शहर से गुजरने वाली शामली रोड और मेरठ रोड पर डग्गामार वाहनों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। इन गाड़ियों में रोजाना क्षमता से कई गुना अधिक सवारियाँ ठूँस-ठूँस कर भरी जाती हैं, जिससे यात्रियों की जान जोखिम में पड़ती है। डग्गामार वाहन चालक तेज रफ्तार, ओवरलोडिंग और लापरवाही से सड़क पर फर्राटा भरते हैं। सीटों से दोगुने-तिगुने यात्रियों को भर लिया जाता है, जिनमें महिलाएँ, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल होते हैं। कई यात्री वाहन के दरवाजे और छत तक पर लटककर सफर करने को मजबूर दिखाई देते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ये वाहन किसी भी वक्त बड़े हादसे को दावत दे रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद इनके संचालन पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। दूसरी ओर पुलिस और परिवहन विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि अवैध व ओवरलोड गाड़ियां खुलेआम रोड पर दौड़ रही हैं, पर किसी भी तरह की कार्रवाई नजर नहीं आती। बडी बात यह है कि ये डग्गामार वाहन पुलिस की आंखों के सामने से खुलेआम गुजर रहे है, लेकिन किसी तरह की रोक-टोक न होना पुलिस कार्यशैली पर सवाल उठाने के लिए काफी है। दैनिक यात्रियों और क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से सख्त अभियान चलाने, डग्गामार वाहनों पर तत्काल रोक लगाने तथा सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि सड़क सुरक्षा को मजबूत किया जा सके और संभावित दुर्घटनाओं से बचा जा सके।








