मुजफ्फरनगर। कलक्ट्रेट स्थित जिला पंचायत सभागार में आयोजित किसान दिवस उस समय हंगामेदार हो गया, जब किसानों ने अपनी समस्याएं उठाते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। किसान दिवस में जहां एक ओर अधिकारियों ने किसानों की समस्याएं सुनने का दावा किया, वहीं दूसरी ओर किसानों ने खुले मंच से अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और मनमानी के आरोप लगाते हुए जमकर विरोध दर्ज कराया।
बैठक के दौरान किसानों ने कहा कि उनकी शिकायतों का वर्षों से समाधान नहीं किया जा रहा है और अधिकारी केवल कागजी खानापूर्ति कर रहे हैं। किसानों का आरोप था कि राजस्व, विद्युत और सिंचाई विभाग से जुड़ी समस्याओं में बिना रिश्वत के कोई काम नहीं होता। किसानों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अधिकारी भ्रष्ट हो चुके हैं और उनकी सुनवाई नहीं कर रहे हैं। सबसे अधिक हंगामा किसानों के घरों में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर को लेकर हुआ। किसानों ने कहा कि बिना सहमति और पर्याप्त जानकारी के जबरन स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, जिससे बिजली बिल बढ़ने का डर बना हुआ है। किसानों का आरोप था कि स्मार्ट मीटर के नाम पर उपभोक्ताओं का शोषण किया जा रहा है। इस मुद्दे पर किसानों और बिजली विभाग के अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। किसान नेताओं ने मंच से सवाल उठाया कि जब पहले से ही महंगे बिजली बिलों से किसान परेशान हैं, तो स्मार्ट मीटर लगाकर उनकी परेशानी और क्यों बढ़ाई जा रही है। किसानों ने स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर रोक लगाने और पुराने मीटर ही बहाल रखने की मांग की।अधिकारियों ने किसानों को आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं का समाधान नियमानुसार किया जाएगा और स्मार्ट मीटर को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर किया जाएगा। हालांकि अधिकारियों के आश्वासन से किसान संतुष्ट नजर नहीं आए और उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। किसान दिवस के दौरान पूरे समय तनावपूर्ण माहौल बना रहा। किसानों ने एक सुर में कहा कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया, तो आने वाले समय में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।







