सेवानिवृत्त इंजीनियर से हडपे से 33 लाख, साइबर थाना पुलिस ने 10 दिन में चेहरे किए बेनकाब
99500 की नगदी, 15 फोन, 39 सिम कार्ड बरामद, पुलिस टीम को 25 हजार का ईनाम
मुजफ्फरनगर। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने लोक निर्माण विभाग के सेवानिवृत्त इंजीनियर से डिजीटल अरेस्ट का खौफ दिखाकर 33 लाख 33 हजार रूपये हड़पने वाले दो साइबर ठगों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनके पास से 99500 की नगदी के अलावा बड़ी संख्या में मोबाइल, सिम कार्ड, पास बुक बरामद की है। गिरोह का सरगना राजू अभी फरार है। आरोपी ईडी, सीबीआई, आईपीएस और न्यायिक अधिकारियों के नामों का दुरूपयोग कर लोगों को अपना शिकार बनाते रहे हैं। गैंग के तार भारत के कई राज्यों के अलावा कंबोडिया तक जुडे़ है। एसएसपी ने पुलिस टीम को 25 हजार का पुरस्कार देने की घोषणा की है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा ने पुलिस अधीक्षक क्राइम इंदू सिद्धार्थ के साथ साइबर थाना पुलिस की कामयाबी को मीडिया से साझा की। उन्होंने बताया कि छह सितंबर को लोक निर्माण विभाग के सेवानिवृत्त इंजीनियर आरके सिंह से डिजीटल अरेस्ट के नाम पर 33 लाख 33 हजार रूपये ठग लिए गए थे।
साइबर ठगों ने पहले ईडी का अधिकारी बनकर खाते के लेन-देन के नाम पर आतंकित किया। ईडी के बाद सीबीआई अधिकारी बनकर रिटायर्ड अधिकारी को डराया और धमकाया। बात यही नहीं थमी आईपीएस और न्यायिक अधिकारी बनकर काॅल की गई। दहशत में आए सेवानिवृत्त इंजीनियर ने ठगों को 33 लाख 33 हजार रूपये की रकम सौंप दी। एसएसपी ने बताया कि यह मामला संज्ञान में आने के बाद एसपी क्राइम इंदू सिद्धार्थ की अगुवाई में विशेष टीम गठित की गई।
एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने ऑपरेशन साइबर के तहत साइबर थाना पुलिस ने दस दिन की भागदौड़ के बाद कामयाबी हासिल की। सैकडों कैमरों का अवलोकन करने के बाद डिजीटल अरेस्ट के खेल में शामिल निखिल गोयल निवासी आनंद विहार ऋषिकेश और हरप्रीत सिंह उर्फ हर्ष निवासी छत्तीसगढ़ को गिरफ्तार कर लिया। इनके पास से 99,500 की नगदी के अलावा 39 सिम कार्ड, 21 एटीएम, 15 पास बुक, 13 मोबाइल, तीन चैक बुक, स्कूटी आदि सामान बरामद हुआ। गिरोह का सरगना राजू अभी फरार है, जिसके तार कंबोड़िया तक जुड़े है। एसएसपी ने पुलिस टीम में शामिल साइबर थाने के प्रभारी निरीक्षक सुल्तान सिंह, उप निरीक्षक गौरव चैहान, धर्मराज सिंह, जय शर्मा, हेड कांस्टेबल अवधेश कुमार, सुनील कुमार, कांस्टेबल रोबिन, अंकुर शर्मा और राहुल कुमार को 25 हजार रूपये का पुरस्कार देने की घोषणा की है।
72 खातों में स्थानांतरित हुए 33 लाख
मुजफ्फरनगर। रिटायर्ड इंजीनियर से ठगी गई 33 लाख 33 हजार रूपये की रकम 72 खातों में स्थानांतरित की गई। एसएसपी वर्मा ने बताया कि साइबर थाना पुलिस की जांच पड़ताल में आया कि रकम मिलते ही यह धनराशि छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, झारखंड आदि राज्यों के बैंक खातों से यह रकम निकाली गई। आरोपी गरीबों के खातों को 20 से 30 हजार रूपये में खरीदकर साइबर ठगी में इस्तेमाल करते है। उन्होंने बताया कि कई खातों में 7 लाख रूपये जमा है, जिन्हें सीज करा दिया गया है। जल्द ही इस रकम को पीड़ित के खाते में स्थानांतरित कराया जायेगा।
46 करोड़ 55 लाख रूपये की अब की ठगी
मुजफ्फरनगर। एसएसपी संजय वर्मा के मुताबिक साइबर थाना पुलिस की जांच पड़ताल में कई चैंकाने वाले खुलासे हुए है। पकड़ में गए खातों की जांच से पता चला कि इनके खातों में अब तक 46 करोड़ 55 लाख का लेन-देन हो चुका है। इतनी बड़ी मोटी रकम 44 मामलों में हड़पी गई है।इनमें से एक खाते में सबसे ज्यादा 26 करोड़ 29 लाख रूपये का लेन-देन हुआ है। आरोपियों का गैंग कई राज्यों में सक्रिय है, जो ईडी, सीबीआई आदि के अधिकारियों के नामों का दुरूपयोग कर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं।
एटीएम बूथ से रकम निकालते हुए पकड़ में आए आरोपी
मुजफ्फरनगर। जिले में डिजीटल अरेस्ट के कई मामले सामने आए है, लेकिन साइबर थाना पुलिस ने पहली बार इस गैंग से जुडे़ लोगों को उनके अंजाम तक पहुंचाया है। निःसंदेह डिजीटल अरेस्ट के इस मामले में साइबर थाना पुलिस की कार्यवाही बेहद सराहनीय है। पुलिस टीम ने दिन-रात मेहनत कर ठगों की गिरफ्तारी की है। सूत्रों के माने तो पुलिस को एटीएम बूथ से महत्वपूर्ण सुराग मिला था। इन खलनायकों ने ऋषिकेश के एक एटीएम ने ठगी गई रकम निकाली थी। उसी आधार पर पुलिस ने जांच बढ़ाते हुए उन्हें दबोचा है।






